‘1962 में हार का कारण थे नेहरू के फैसले’, शशि थरूर ने कहा – मैं उनका फैन हूं, पर कुछ फैसले गलत थे

नई दिल्ली

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है. शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि वह भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, मगर उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है. शशि थरूर ने माना कि नेहरू के कुछ फैसलों के कारण 1962 में भारत को चीन से हार मिली, मगर हर चीज के लिए नेहरू को दोषी ठहराना ठीक नहीं. शशि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को मानना ​​जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोष देना गलत है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘मैं जवाहरलाल नेहरू का प्रशंसक हूं, लेकिन आंख बंद करके समर्थन नहीं करता. मैं उनकी सोच और दृष्टिकोण की बहुत सराहना करता हूं और उनके प्रति गहरा सम्मान रखता हूं. हालांकि मैं उनकी सभी नीतियों और विचारों से सौ फीसदी सहमत नहीं हूं. उन्होंने जो कई काम किए, वे सबसे ज्यादा सराहना के योग्य हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया… मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी है, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं. नेहरू को एक सॉफ्ट टारगेट यानी आसान निशाना बना दिया गया है.’

नेहरू के फैसलों की आलोचना

साल 1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए शशि थरूर ने कहा कि मौजूदा सरकार की पंडित नेहरू पर की जा रही आलोचना का कुछ आधार हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए 1962 में चीन के खिलाफ मिली हार को कुछ हद तक नेहरू के फैसलों से जोड़ा जा सकता है. लेकिन अब जो हो रहा है, वह यह है कि नेहरू को हर बात के लिए दोषी ठहराया जाता है, चाहे मुद्दा कुछ भी हो.’

उन्होंने कहा, 'सबसे जरूरी यह है कि नेहरू ही थे, जिन्होंने भारत में लोकतंत्र स्थापित किया…। मैं ये नहीं कहूंगा कि वो (मोदी सरकार) लोकतंत्र के विरोधी हैं, लेकिन वो नेहरू विरोधी जरूर हैं। नेहरू को आसान बली का बकरा बना दिया गया है।'

उन्होंने कहा, 'कुछ मामलों में उनका (मोदी सरकार की) आलोचना का आधार हो सकता है। उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार का कुछ श्रेय नेहरू के कुछ फैसलों को दिया जा सकता है।'
पार्टी लाइन पर दी थी सफाई

थरूर ने सोमवार को कहा कि वह कभी भी पार्टी लाइन से अलग नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा सवाल यह है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी की विचारधारा का उल्लंघन किया है? मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की है, लेकिन अधिकतर मामलों में पार्टी और मैं एक ही रुख पर कायम रहे हैं।' थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में मंत्रियों के सामने जो सवाल उठाए थे, उनकी एक स्पष्ट दिशा थी और पार्टी को उनसे परेशान नहीं होना चाहिए।

यादों की गलियों में सफर

अपनी यादों को ताजा करते हुए शशि थरूर ने बताया कि उन्हें पढ़ने का शौक बचपन में ही लग गया था, जब न टीवी था और न ही मोबाइल फोन. कांग्रेस सांसद ने याद किया कि उन्होंने पहली बार बहुत कम उम्र में ही उपन्यास लिखा था, लेकिन बाद में वह स्याही गिरने की वजह से खो गया.

शशि थरूर ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदतें कम हो रही हैं, लेकिन केरल में पढ़ने की संस्कृति अब भी आगे है. कांग्रेस नेता ने दिल्ली के प्रसिद्ध सेंट स्टीफन कॉलेज के अपने कॉलेज के दिनों को भी याद किया, जहां उन्होंने एक बार मंच पर एंटनी का किरदार निभाया था और फिल्म निर्माता मीरा नायर ने क्लियोपेट्रा की भूमिका निभाई थी.

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