सादगी और जनसेवा का उदाहरण: सीएम मोहन यादव बेटे की शादी में करेंगे सामूहिक विवाह सम्मेलन में

भोपाल 

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर सादगी और सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करने जा रहे हैं। उन्होंने अपने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव का विवाह किसी भव्य आयोजन में नहीं, बल्कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में कराने का निर्णय लिया है। यह पहला अवसर होगा जब कोई मुख्यमंत्री अपने पुत्र का विवाह सामूहिक समारोह में संपन्न कराएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमेशा अपने जीवन और कार्यशैली में सादगी को प्राथमिकता दी है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने पारिवारिक आयोजन को भी समाजहित से जोड़ा है। 

जानकारी के अनुसार, 30 नवंबर को उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में मुख्यमंत्री के पुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव, डॉ. इशिता यादव के साथ सात फेरे लेंगे। इशिता, खरगोन जिले के किसान दिनेश यादव की पुत्री हैं। अभिमन्यु और इशिता की सगाई लगभग पांच महीने पहले भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में संपन्न हुई थी। डॉ. अभिमन्यु ने भोपाल में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और पढ़ाई के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री निवास के बजाय कॉलेज हॉस्टल में रहे।

बेटे अभिमन्यु की शादी उज्जैन में

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तय किया है कि उनके छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव का विवाह 30 नवंबर को उज्जैन के होटल अथर्व में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में होगा। इस आयोजन में 21 जोड़े एक साथ परिणय सूत्र में बंधेंगे। मुख्यमंत्री के बेटे के विवाह का हिस्सा बनना इस सम्मेलन को प्रतीकात्मक रूप से और भी खास बना देगा। डॉ. अभिमन्यु का विवाह डॉ. इशिता यादव से होगा, जो खरगोन जिले के प्रख्यात किसान दिनेश यादव की पुत्री हैं। दोनों की सगाई इसी वर्ष, लगभग पांच महीने पहले, भोपाल के मुख्यमंत्री निवास में संपन्न हुई थी।

भिमन्यु की सादगी और आत्मनिर्भरता की कहानी

मुख्यमंत्री के पुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव ने भोपाल में रहकर चिकित्सा शास्त्र की पढ़ाई पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान मुख्यमंत्री निवास की बजाय कॉलेज हॉस्टल में रहना चुना। उनका कहना था कि छात्र जीवन का असली अनुभव और अनुशासन हॉस्टल में ही मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी उस समय साफ कहा था कि – “मुख्यमंत्री निवास किसी विद्यार्थी के लिए नहीं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है। पढ़ाई की असली जगह कॉलेज और हॉस्टल हैं।” यह सोच दर्शाती है कि उन्होंने अपने बच्चों में भी अनुशासन, आत्मनिर्भरता और ज़मीन से जुड़े रहने की सीख दी है।

सादगी से भरा विवाह, समाज के लिए संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने परिवारजनों को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अभिमन्यु की शादी सादगी से, बिना दिखावे के और सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही होगी। इस आयोजन में गरीब और सामान्य परिवारों की बेटियों की भी शादियां होंगी, जिससे यह समारोह समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक बन जाएगा। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से यह संदेश जाता है कि उच्च पद पर रहते हुए भी व्यक्ति अपनी जड़ों और सामाजिक संवेदनाओं से जुड़ा रह सकता है।

उज्जैन में मिथक तोड़कर पेश की थी नई सोच

मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी सामाजिक परंपराओं में नई सोच के लिए चर्चा में रहे हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सवाल उठा था कि महाकाल की नगरी उज्जैन में मुख्यमंत्री को रात्रि विश्राम नहीं करना चाहिए, क्योंकि वर्षों से यह एक प्रचलित मान्यता रही है। लेकिन मोहन यादव ने इस मान्यता को तोड़ते हुए कहा – “मैं महाकाल का भक्त और पुत्र हूं, मेरे लिए उज्जैन मेरा घर है, और महाकाल की नगरी में रुकना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” उस रात उन्होंने उज्जैन में रात्रि विश्राम कर यह मिथक समाप्त किया और यह दिखाया कि श्रद्धा और कर्म के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि संतुलन संभव है।

सादगी और परिवार की मर्यादा का उदाहरण

मुख्यमंत्री मोहन यादव उन विरले नेताओं में से हैं जिनका परिवार कभी भी शासकीय आवास में स्थायी रूप से नहीं रहा। वे अपने परिवार को राजनीति से दूर रखते हैं और हमेशा आम जीवनशैली अपनाने पर ज़ोर देते हैं। उनका मानना है कि नेता की पहचान उसके आचरण और सादगी से होती है, न कि उसके पद से। यही कारण है कि आज वे अपने बेटे की शादी भी समाज की बेटियों के साथ एक ही मंच पर करवा रहे हैं — यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि एक संदेश है – “समानता और सादगी का।”

बताया जा रहा है कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में सभी समाजों के 20 जोड़े शामिल होंगे। इसमें मुख्यमंत्री की तरफ से ही सभी जोड़ों को गिफ्ट भी दिया जाएगा। बता दें मुख्यमंत्री समाज के लोगों को पहले से ही सादगी और सरल जीवन यापन करने के लिए प्रेरित करते आए हैं।  डॉ. मोहन यादव की पहचान हमेशा एक ऐसे जननेता के रूप में रही है जो परंपरा और आधुनिकता दोनों को समान महत्व देते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनका परिवार शासकीय आवास में शिफ्ट नहीं हुआ। वे अपने परिवार को सरकारी सुख-सुविधाओं से दूर रखते हैं।  

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