हर क्षेत्र में विकास की रौशनी, हर हाथ में अवसर का भरोसा

भोपाल
मध्यप्रदेश आज उस नई यात्रा पर है, जहाँ विकास अब कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाँव-गाँव, हर अंचल तक पहुँचने लगा है। यह वही परिवर्तन है, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने विज़न और संकल्प से साकार किया है। उनका मानना है कि विकास तभी सच्चा होता है, जब उसका लाभ हर क्षेत्र और हर नागरिक तक पहुँचे। इसी सोच ने राज्य को एक नई दिशा दी है जहाँ औद्योगिक प्रगति केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में शुरू हुई यह यात्रा “विकसित मध्यप्रदेश 2047” के विज़न पर आधारित है — एक ऐसा विज़न, जो उद्योग, निवेश और रोजगार को एक सूत्र में जोड़ता है। राज्य सरकार ने इस दिशा में जो कदम उठाए हैं, उन्होंने मध्यप्रदेश को निवेश, नवाचार और अवसरों का नया केंद्र बना दिया है।

हर क्षेत्र को अवसरों से जोड़ने की नई पहल
कभी औद्योगिक गतिविधियाँ केवल इंदौर और भोपाल जैसे शहरों तक सीमित थीं। लेकिन मुख्यमंत्री की सोच ने इस सीमितता को तोड़ दिया। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में “रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव्स” आयोजित किए गए, जिन्होंने निवेश को स्थानीय पहचान से जोड़ा। रीवा का “वाइब्रेंट विंध्य,” सागर का “बुंदेलखंड ऑन द रोड टू प्रोग्रेस” और जबलपुर का “कॉनफ्लुएंस ऑफ इंडस्ट्रीज”, ये सभी आयोजन सिर्फ सम्मेलन नहीं रहे, बल्कि उन्होंने यह संदेश दिया कि हर क्षेत्र अब उद्योग और निवेश की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है।

इन आयोजनों ने यह सिद्ध किया कि औद्योगिक विकास तभी सार्थक है जब वह स्थानीय लोगों की भागीदारी और क्षेत्रीय पहचान के साथ जुड़ा हो। यही वजह है कि आज निवेश के अवसर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के नए औद्योगिक मानचित्र में हर अंचल की अपनी पहचान बन रही है।

जनभागीदारी और विश्वास से आगे बढ़ता ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2025 को ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ घोषित कर इसे एक जनआंदोलन का रूप दिया है। इस पहल का मकसद स्पष्ट है , हर निवेश का परिणाम लोगों तक पहुँचे, हर उद्योग रोजगार का माध्यम बने।

इस वर्ष प्रदेश में कई महत्वपूर्ण आयोजन हुए उज्जैन का स्पिरिचुअल एंड वेलनेस समिट, इंदौर का टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव, रीवा का पर्यटन कॉन्क्लेव और नरसिंहपुर-मंदसौर के कृषि-उद्योग सम्मेलन। इन आयोजनों ने यह साबित किया कि विकास अब केवल उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को जोड़ने वाला अभियान बन गया है।

निवेश के प्रति भरोसे का वातावरण
राज्य सरकार ने नीति निर्माण में पारदर्शिता और भरोसे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में 18 नई औद्योगिक नीतियों का शुभारंभ हुआ। इन नीतियों में बड़े उद्योगों से लेकर MSME, ईवी, ईएसडीएम, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे सभी क्षेत्र शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुनिश्चित किया कि नीतियाँ केवल कागज़ों पर न रहें, बल्कि ज़मीनी स्तर पर लागू हों। वित्त वर्ष 2024-25 में उद्योगों को 5,260 करोड़ रु. से अधिक की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। यह निवेशकों के विश्वास और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

प्रतिभा ही प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी
रतलाम में आयोजित एमपी राइज कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री की उस सोच का उदाहरण रहा जिसमें मानव संसाधन को विकास की सबसे बड़ी पूंजी माना गया। इस आयोजन से 30,402 करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव मिले और 35,520 से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बने। यही नहीं, 263 युवाओं को मौके पर ही नियुक्ति पत्र सौंपे गए — यह दर्शाता है कि प्रदेश में अब नीतियाँ ज़मीन पर परिणाम दे रही हैं।

आत्मविश्वास से भरे मध्यप्रदेश की नई पहचान
पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने 397 औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की है, जिनसे 2.48 लाख करोड़ रु. से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। निर्यात में 6% की वृद्धि और राष्ट्रीय रैंकिंग में 15वें से 11वें स्थान तक पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश अब आत्मविश्वास और अवसरों से भरा राज्य बन चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना हैं कि विकास केवल निर्माण नहीं, सृजन है अवसरों का, रोजगार का और आत्मविश्वास का। मध्यप्रदेश आज उसी सृजन की यात्रा पर है, जहाँ हर उद्योग एक उम्मीद है, हर क्षेत्र एक प्रेरणा है और हर नागरिक इस परिवर्तन का सहभागी है।

 

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