2.12 करोड़ मतदाताओं के SIR के लिए छत्तीसगढ़ तैयार, प्रक्रिया जारी रहेगी 7 फरवरी तक

रायपुर

 बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम पूरा होने के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर के दूसरे चरण की घोषणा की। यहां एसआइआर का काम मंगलवार यानी आज 28 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा और सात फरवरी तक चलेगा।
प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की तैयारी पूरी कर ली गई है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मंगलवार से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रदेश में 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार मतदाता हैं।

प्रदेश में पंचायत चुनाव में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने 1 जनवरी 2025 की तिथि में मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 5,391 बताई थी। इसमें 1 करोड़ 4 लाख 27,834 पुरुष, 1 करोड़ 6 लाख 76,821 महिला और 736 तृतीय जेंडर मतदाता शामिल हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर को लेकर पुरानी और वर्तमान लिस्ट का मिलान किया जा चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में एसआईआर एक साथ लागू किया जाएगा। सर्वे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। एसआईआर में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा। बीएलओ घर-घर जाकर 2003 की लिस्ट से मिलान करेंगे और कमियों को दूर करेंगे।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया निर्णय का स्वागत

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के एसआईआर के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जो पात्र और देश के नागरिक हो, उनके ही नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। एसआईआर का निर्णय स्वागत योग्य है।

भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान पर स्पष्टता की मांग की है। दिल्ली रवाना होने से पहले सोमवार को राजधानी के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एसआईआर की घोषणा हो गई है, लेकिन चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि बिहार में कितने बांग्लादेशी चिन्हित किए गए और उनमें से कितने की सूची केंद्र सरकार को दी गई है।

इनमें कितने लोग बाहर हुए हैं क्योंकि एसआईआर से विदेशी नागरिक भगाने की बात कही गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय अभी तक यह नहीं बता पाया है कि छत्तीसगढ़ में कितने पाकिस्तानी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया था कि तीन दिनों के भीतर जितने भी पाकिस्तानी हैं, उन्हें बाहर किया जाए। लेकिन, राज्य सरकार अभी तक पाकिस्तानी लोगों की पहचान नहीं कर पाई है।

12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता

जिन 12 राज्यों में दूसरे चरण में एसआइआर का काम होने जा रहा है, उनमें मतदाता की संख्या करीब 51 करोड़ है। इनमें सबसे अधिक 15.44 करोड़ मतदाता अकेले उत्तर प्रदेश में है, जबकि बंगाल में 7.66 करोड़, तमिलनाडु में 6.41 करोड़, मध्य प्रदेश में 5.74 करोड़, राजस्थान में 5.48 करोड़ व छत्तीसगढ़ में 2.12 करोड़ मतदाता हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस दौरान साफ किया है कि जिन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर की घोषणा की गई है, उन सभी राज्यों की मतदाता सूची में तत्काल प्रभाव से फेरबदल पर रोक लगा दी है। इस बीच इनमें न तो कोई नाम जोड़ा जा सकेगा और न ही हटाया जा सकेगा। एसआइआर के दौरान प्रत्येक मतदाता को एक यूनिक फॉर्म दिया जाएगा। इसमें पुराना पता, फोटो आदि छपा हुआ होगा। यदि मतदाता उस पते पर नहीं रह रहा है तो वह उसमें संशोधन कर सकता है। आयोग ने इस दौरान मतदाताओं को सुझाव दिया है कि गणना फार्म में अपने रंगीन फोटो लगाएं ताकि जो पहचान पत्र जारी किए जाने हैं, उनमें चेहरे उभरकर सामने आ सकें।
इन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में होगा एसआइआर

उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, राजस्थान, केरल, गुजरात, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार। इनमें से बंगाल, तमिलनाडु, केरल व पुडुचेरी में अगले साल यानी 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा में 2027 में विधानसभा होने हैं।
यह रहेगा मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम

    गणना पत्रों की छपाई व बीएलओ को प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक।
    घर-घर जाकर पुनरीक्षण का काम- चार नवंबर से चार दिसंबर तक।
    मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन- नौ दिसंबर दावे और आपत्तियों का समय- नौ दिसंबर से आठ जनवरी 2026 तक।
    दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस, सुनवाई, सत्यापन : नौ दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक ।
    अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन- सात फरवरी 2026।

अब तक आठ बार एसआइआर

मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण का काम देश में कोई पहली बार नहीं हो रहा है। 1951 से 2004 तक यह आठ बार हो चुका है। अंतिम बार यह 21 साल पहले 2002 से 2004 के बीच देश के अधिकांश राज्यों में हुआ था। आयोग ने कहा कि एसआइआर का यह काम राजनीतिक दलों की ओर से लगातार मतदाता सूची की गडबड़ियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बाद शुरू किया गया है। इसके जरिए मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है।
आखिर, एसआइआर क्यों जरूरी?

आयोग ने बताया कि एसआइआर क्यों जरूरी है? उसके मुताबिक, बदलते शहरीकरण में लोगों का तेजी से विस्थापन हो रहा है। यह इसकी एक बड़ी वजह है। दूसरा इसके चलते काफी लोगों के मतदाता सूची में दो-दो जगह नाम दर्ज हैं। तीसरा मतदाता सूची में मतदाताओं के मृत होने के बाद भी नामों का हटाया नहीं जाना है। चौथी वजह देश के तमाम हिस्सों में गलत तरीके से घुसपैठ करके बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जुड़वा लिया है। एसआइआर के दौरान इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो सकेगी।
सभी राज्य सरकारें सहयोग के लिए प्रतिबद्ध, किसी दल से कोई मनमुटाव नहीं

बंगाल में एसआइआर को लेकर सत्ताधारी दलों की ओर से की जा रही विरोधी टिप्पणियों से जुड़े सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने कहा कि एसआइआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है। संविधान के तहत राज्य सरकारें चुनाव आयोग को हर तरह का सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। कानून व्यवस्था राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। अब तक बंगाल या किसी अन्य राज्य से उन्हें किसी तरह का असहयोग नहीं मिला है। उम्मीद है कि सभी राज्य अपनी जिम्मेदारी अच्छे से समझते हैं और वे कोई ऐसी स्थिति नहीं पैदा होने देंगे।

बिहार एसआइआर के दौरान आयोग पर वोट चोरी जैसे लगाए गए आरोपों पर आयोग ने कहा कि शीर्ष स्तर पर भले ही राजनीतिक दलों ने कुछ भी टिप्पणी की हों लेकिन जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों ने पूरा सहयोग किया। राजनीतिक दलों से जुड़े बूथ लेवल एजेंट हों या जिला अध्यक्ष, सभी ने सहयोग किया। आयोग का किसी दल से कोई मनमुटाव नहीं है और न ही वह किसी के खिलाफ टिप्पणी करता है।

 

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