झूठे आरोपों की कीमत चुकाई महिला ने, हाई कोर्ट ने MP पुलिस को आदेश दिए

जबलपुर
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता के विरुद्ध दो वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म की एफआईआर को झूठा पाया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला पहले भी ब्लैकमेल की नीयत से इस तरह की कई झूठी रिपोर्ट दूसरों के विरुद्ध दर्ज करा चुकी है। कोर्ट ने अधिवक्ता के विरुद्ध दर्ज एफआईआर निरस्त कर दी। साथ ही रीवा एसपी को निर्देश दिए कि फर्जी शिकायत करने वाली महिला के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट की धारा 22(1) व बीएनएस की धाराओं 240 व 248 के तहत कार्रवाई की जाए।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, रीवा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि रीवा निवासी महिला उनके ऑफिस में 15 मई, 2024 को एक आपराधिक मुकदमा दायर करने के लिए आई। मुकदमा तैयार करते समय याचिका कर्ता को रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चला कि महिला ने पहले भी कई व्यक्तियों के विरुद्ध शिकायतें की थीं। वह झूठी शिकायत दर्ज करा कर लोगों को ब्लैकमेल करने की आदी थी।
 
महिला ने झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई
यह देखते हुए उन्होंने उसके केस की पैरवी करने से इनकार कर दिया। इस पर महिला ने 30 नवंबर, 2024 को कि याचिका कर्ता के विरुद्ध लज्जा भंग करने की झूठी एफआईआर दर्ज कर दी। 27 दिसंबर, 2024 को महिला ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराई । जिसमें कहा गया कि 20 दिसंबर, 2024 को हाई कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर-15 के सामने याचिका कर्ता ने उसकी दो वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। दोनों मामलों की जांच के बाद पुलिस ने झूठा पाया। इसके बाद 11 जून, 2025 को सिविल लाइन थाना रीवा में महिला ने एक और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई।

झूठी एफआईआर दर्ज करने की आदी है महिला
इस बार उसने आरोप लगाया कि उसके पति की अनुपस्थिति में याचिका कर्ता ने रात को उसके घर में घुसकर दो साल की बच्ची से दुष्कर्म किया। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए इस तरह की झूठी एफआईआर दर्ज करने की आदी है। कोर्ट ने रिकॉर्ड के अवलोकन से पाया कि महिला पहले भी अपनी बच्चियों व स्वयं के नाम से इस तरह की कई फर्जी एफआईआर दर्ज करा चुकी है।

इस मत के साथ कोर्ट ने याचिका कर्ता के विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में शिकायतकर्ता महिला अगर ऐसी कोई शिकायत करती है, तो कोई कठोर कार्रवाई करने से पहले प्रारंभिक जांच कर संतुष्टि कर ली जाए।

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