देश छोड़कर मत जाना’– केंद्रीय मंत्री शिवराज ने छात्रों को दिया बड़ा संदेश

भोपाल 

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) भोपाल के 12वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों से भावुक अपील की कि वे देश छोड़कर बाहर न जाएं, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल को भारत की प्रगति में ही लगाए। 

समारोह में संस्थान की नई इनोवेशन मैगजीन और ब्रॉशर का विमोचन हुआ तथा रिसर्च और स्टार्टअप उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा भी दिया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और IISER चेयरपर्सन प्रो. अरविंद आनंद नाटू विशेष रूप से मौजूद रहे।

छात्रों को मिला विशेष सम्मान

इस वर्ष बायोकेमिस्ट्री विभाग के छात्र कौशिक मेहंदी को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। शैक्षणिक प्रदर्शन, नेतृत्व कौशल और योगदान के आधार पर उन्हें डायरेक्टर गोल्ड मेडल के लिए भी चुना गया। इसके अलावा संस्थान ने बेस्ट एकेडमिक परफॉर्मेंस की सूची घोषित की, जिसमें वरुण अजीत नायर, आशीष शुक्ला, देवाशीष तिवारी, कौशिक मेहंदी, महेश और अगम दीप सिंह समेत अन्य छात्रों के नाम शामिल हैं।

423 छात्र-छात्राएं स्नातक हुए

संस्थान के डायरेक्टर प्रो. गोवर्धन दास ने बताया कि इस बार कुल 423 छात्र-छात्राओं ने स्नातक किया। इनमें 227 बीएसएमएस, 51 बीएस, 56 एमएस और 89 पीएचडी शामिल हैं। उन्होंने स्नातकों को भविष्य के इनोवेटर्स और लीडर्स बताते हुए कहा कि IISER ने बहुविषयक शिक्षा को प्रोत्साहन दिया है और अब नेचुरल साइंसेस के साथ सोशल साइंसेस, ह्यूमैनिटीज और इंजीनियरिंग पर भी काम कर रहा है।

इस सत्र से नए पाठ्यक्रम शुरू प्रो. दास ने यह भी बताया कि इस सत्र से संस्थान में बीटेक और एमए (लिबरल आर्ट्स) कोर्स भी शुरू किए गए हैं। IISER भोपाल की छात्र संख्या लगभग तीन हजार के करीब पहुंच चुकी है और इनमें लगभग 35 प्रतिशत विद्यार्थी महिलाएं हैं। यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

340 करोड़ का अनुदान मिला प्रो. दास ने संस्थान की रिसर्च बेस्ड उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि अब तक IISER भोपाल के 847 प्रोजेक्ट्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय 45 एजेंसियों से फंडेड हुए हैं। संस्थान को कुल मिलाकर करीब 340 करोड़ रुपए का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है। उनकी फैकल्टी ने 4,000 से अधिक पियर-रि‍व्यूड लेख प्रकाशित किए हैं, 60 से अधिक पेटेंट हासिल किए गए हैं और 50 से अधिक संस्थानों के साथ एमओयू दर्ज हैं। वर्तमान में संस्थान में लगभग 160 नियमित फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं और यह संख्या विस्तार के रास्ते पर है।

IISER में केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से स्टेट ऑफ आर्ट हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाएं विकसित की गई हैं, जो आज के कटिंग-एज टेक्नोलॉजी के अनुरूप अनुसंधान को सशक्त बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा संस्थान में रिसर्च पार्क का विकास भी जोरों पर है, ताकि रिसर्च बेस्ड स्टार्टअप और उद्योगों को सहयोग और संसाधन मिल सके।

प्रो. दास ने कहा, IISER भोपाल ने कृषि व टेक्नोलॉजी के संयोजन पर भी विशेष बल दिया है। संस्थान ने प्रस्ताव रखा है कि यहां एक सेंटर फॉर एग्रो टेक्नोलॉजी रिसर्च स्थापित किया जाए, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नयी नयी तकनीकों के माध्यम से किसानों की आजीविका में सुधार लाना होगा। संस्थान की रिसर्च टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को कृषि से जोड़ने पर काम कर रही है। जिससे ताकि किसान यह जान सकें कि कौन-सी फसल कब और किस तरीके से लगानी चाहिए, संभावित जोखिम क्या हैं और उनसे निपटने के वैधानिक तथा तकनीकी उपाय क्या हो सकते हैं। ड्रोन इमेजरी की मदद से फसलों की सटीक निगरानी, रोगों का शीघ्र पता और जल प्रबंधन संभव होगा। जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इसके अलावा संस्थान में प्रकाशित शोधों में सिकल सेल एनीमिया के इलाज के लिए स्टेम सेल तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो बीमारियों के नए उपचार के रास्ते खोल सकते हैं।

मंत्री नहीं, मामा बनकर आया हूं

समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि IISER का परिसर देखकर उन्हें दिव्यता का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा – नाटू साहब ने मेरा परिचय मंत्री के रूप में दिया, लेकिन मैं यहां मामा बनकर आया हूं।' चौहान ने छात्रों से कहा कि भारत की पुरानी विद्वता आज भी हमें ज्ञान का प्रकाश देती है और नए शोधकर्ताओं का कर्तव्य है कि वे इस विरासत को आगे बढ़ाएं।

उन्होंने कहा- 'देश छोड़कर मत जाना, असली सुख तब है जब आपका ज्ञान अपने देश और समाज के काम आए।'

किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग उन्होंने छोटे और संसाधन सीमित किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर दिया। जिसमें मधुमक्खी पालन, पशुपालन और विविध फसल प्रबंधन कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकें। चौहान ने छात्र-उद्यमियों से कहा कि यदि उनके पास प्रोजेक्ट हैं तो वे भोपाल में उपलब्ध हैं; और यदि वे दिल्ली में हैं तो संपर्क कर सकते हैं। वे दोनों जगहों पर सहायता के लिए तत्पर हैं।

दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत नहीं दीक्षांत समारोह के अंत में प्रो. दास और अतिथियों ने स्नातकों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि दीक्षा का अर्थ अध्ययन का अंत नहीं, बल्कि प्रारम्भ है। अब ज्ञान के साथ कौशल है और उसका प्रयोग समाज के उत्थान के लिए होना चाहिए।

 

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