स्वस्थ पर्यावरण की ओर कदम: इंदौर में शुरू होगा मध्यप्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन

  •      इंदौर में बनेगा प्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन, लगेंगे लाखों पौधे
  •     अगले एक साल में 50 टन कचरा कम करने का लक्ष्य।
  •     तीन साल पहले सूखा कचरा 650-750 टन था।
  •     अब शहर में सूखा कचरा 450-500 टन हो गया है।

इंदौर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत देशभर में अब तक 141 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। पीएम मोदी के आव्हान पर यह पर्यावरणीय जनांदोलन निरंतर प्रगति पर है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश सरकार के नेतृत्व में यह संकल्प तेजी से धरातल पर साकार होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा और मार्गदर्शन तथा जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की सक्रिय पहल से प्रदेश में पहली बार "ऑक्सीजन गार्डन" की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया जा रहा है। 

 इंदौर शहर अब ग्रीन सिटी बनने की तैयारी में जुटा है। दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण के सम्मान समारोह के बाद हुई राउंड टेबल कांफ्रेंस में इंदौर निगम ने अपने ग्रीन सिटी बनने वाले का भविष्य का रोडमैप बताया। इसमें कचरे के साथ पानी व ऊर्जा के माडल पर काम किया जाएगा। शहर की लगातार बढ़ती आबादी, भौगोलिक स्तर पर शहर को होते विस्तार के कारण इंदौर बढ़ते कचरे को कम करने के लिए अभी से प्रयासरत है।

इंदौर में हर दिन 1250 टन गीला व सूखा कचरा उत्पन्न होता है। पिछले तीन साल में इंदौर ने 250 टन सूखा कचरा कम किया। तीन साल में 19 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम किया गया। वहीं अगले एक साल में इंदौर नगर निगम 21 से 22 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस तरह इंदौर में अगले एक साल में 250 टन के अलावा 50 टन अतिरिक्त कचरा कम करने की तैयारी है।

इंदौर में 11 एकड़ में विकसित होगा ऑक्सीजन गार्डन
इंदौर के कनाडिया क्षेत्र स्थित गुलमर्ग परिसर के पीछे 11 एकड़ के पहाड़ी क्षेत्र में इस विशाल हरित परियोजना की शुरुआत की जाएगी। इस संबंध में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, इंदौर जनपद अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसोदिया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

औषधीय पौधों और पक्षी विहार से सजेगा हरित क्षेत्र
इस पहाड़ी क्षेत्र पर नीम, पीपल, बरगद, अशोक, आम, महुआ, रेन ट्री, जामुन, उंबर सहित लाखों की संख्या में औषधीय एवं छायादार प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। यह ऑक्सीजन गार्डन न केवल नागरिकों को शुद्ध वायु प्रदान करेगा, बल्कि पक्षियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के आगमन से यह स्थल एक प्राकृतिक पक्षी विहार और पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। पौधों की सिंचाई के लिए गुलमर्ग परिसर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट से पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी मंत्री सिलावट ने दिए हैं।

जन भागीदारी से बनेगा पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण
इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसमें पद्मश्री एवं पद्मभूषण सम्मानित नागरिकों, व्यापारी संगठनों, समाजसेवियों, धर्मगुरुओं, किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। यह ऐतिहासिक पहल आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसी अवसर पर सिलावट ने कनाडिया क्षेत्र की गौशाला का भी निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। 

तीन साल में 190 टन गीले कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड जाने से रोका

शहर के घरों व प्रतिष्ठानों से पिछले तीन साल में 190 टन कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचने से रोका गया। इसके लिए इंदौर में 56 हजार घरों के लोगों का विशेष सहयोग मिला। इन घरों में होम कंपोस्टिंग यूनिट के माध्यम से घरों में ही गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। वही शहर के उद्यानों में पिट कंपोस्टिंग, आर्गेनिक वेस्ट वाटर व ड्रम कंपोस्ट के माध्यम से हरित कचरे का निपटान गार्डन परिसर में ही किया जा रहा है।

287 संस्थानों ने 30 टन प्रतिदिन कचरा किया कम

शहर में 287 संस्थाएं ऐसी हैं जो प्रतिदिन 30 किलो से ज्यादा कचरा देती हैं। ऐसे संस्थानों में होटल, मैरिज गार्डन, शैक्षणिक संस्थान हैं। इन संस्थानों ने गीले कचरे के खाद बनाने के उपक्रम लगाए और सूखे कचरे की छंटाई की यूनिट लगाई। परिणामस्वरूप प्रतिदिन 30 टन कचरा नगर निगम को मिलना कम हुआ।

इस तरह कचरे का परिवहन हुआ कम

मोबाइल कंपोस्टिंग वैन : चार वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन आठ से नौ टन गीला कचरा एकत्र कर उससे खाद बनाई जा रही है।

बायोसीएनजी प्लांट : कबीटखेड़ी व चोइथराम मंडी में बायोसीएनजी प्लांट में 35 टन कचरे से गैस बनाई जा रही है। यह कचरा शहर में खत्म हो रहा है।

बढ़ते कचरे के नियंत्रण के लिए भविष्य की तैयारी

वर्तमान में ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 550 टन प्रतिदिन गीले कचरे से खाद बनाने का संयंत्र लगाया गया है। इसकी क्षमता बढ़ाकर 800 टन प्रतिदिन करने की योजना है। इस तरह यह विश्व का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट बन जाएगा।

ग्रीन इंदौर के लिए ये भी हो रहे प्रयास

    इंदौर नगर निगम शहर की वायु गुणवत्ता का स्तर 50 से कम करने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहा है।

    सोलर मित्र योजना के तहत अगले तीन साल में शहर के शत-प्रतिशत घरों में सोलर पैनल से बिजली बनाने के संयंत्र लगाने की योजना। फिलहाल एक माह में एक करोड़ से अधिक विद्युत यूनिट बचाई गई।

    1 लाख 70 हजार घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे। अगले तीन साल में छह लाख घरों में लगवाने की योजना।

    हरित क्षेत्र बढ़ा रहे हैं। अभी शहर में छह स्थानों पर सिटी फारेस्ट विकसित किए गए हैं। शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष पौधे लगाए जाएंगे।

इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे

    ग्रीन इंदौर बनाने के लिए इंदौर निगम लगातार काम कर रहा है। भविष्य में इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे। हमने शहर कचरे को कम करने के लिए प्रयास किए, जिसमें काफी सफलता मिली है। होम कंपोस्टिंग यूनिट, आरआरआर सेंटर बनाकर व सिंगल यूज प्लास्टिक व डिस्पोजेबल पर रोक लगाने से भी यह सफलता हासिल हुई है। इसके अलावा सौर ऊर्जा से बिजली बनाने व रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे। इस तरह इंदौर भविष्य में ग्रीन सिटी के रूप में पहचाना जाएगा। – शिवम वर्मा, निगमायुक्त

 

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