मंत्री शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है

भोपाल

जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है। प्रदेश की प्रमुख पिछड़ी जनजाति में कोल जनजाति तीसरी प्रमुख पिछड़ी जनजाति है। उन्होंने कहा कि कोल जनजाति स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है। संघर्षमयी इतिहास, उनकी शैली और संस्कृति स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये जानी जाती है। मध्यप्रदेश में 10 लाख से भी ज्यादा कोल जनजाति के लोग निवासरत है। रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिण्डौरी में मुख्यत: निवासरत है। बढ़ी आबादी कोल जनजाति केवल मध्यप्रदेश ही नहीं देश के उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य में भी निवास करती है। यह खरवार समूह की एक प्राचीन जनजाति है। ये स्वयं को शबरी माता का वंशज मानते है। कोल शब्द कुल से निकला है, जो समस्त का रूप है।

ग्रामीण सांस्कृति की धड़कन है वाद्ययंत्र

मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि कोल जनजाति का मुख्य जीविकोपार्जन वनोपज संग्रहण, कृषि और मजदूरी पर आधारित है। प्रकृति की पूजा करने वाली यह जनजाति जंगल, नदियों और पहाड़ों से गहरा नाता रखती है। कोल समाज के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र आज भी ग्रामीण संस्कृति की धड़कन है। सरकार और समाज मिलकर कोल जनजाति के उत्थान और सम्मान के लिये कार्य कर रहे है। सरकार द्वारा जनजातियों के विकास के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से और औद्योगिकरण के विकास से कोल जनजाति भी विकास की और अग्रसर है।

शिक्षा और रोजगार पर शासन का फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजाति वर्ग के चहुँमुखी उत्थान के लिये राज्य और केन्द्र सरकार के द्वारा छात्र-छात्राओं के विकास के लिये किये जा रहे समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि कोल जनजाति के छात्र-छात्राएँ आज उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है। राज्य शासन द्वारा म.प्र. प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में सफल होने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अभ्यर्थियों को देय राशि प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 40 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 60 हजार एवं साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 50 हजार की राशि प्रदान की जाती है। इसमें प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की पात्रता के लिए आय सीमा का बंधन नहीं है।

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले जनजातीय वर्ग के सफल अभ्यार्थी जिनके माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 8 लाख से अधिक न हो को प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 25 हजार की राशि प्रदान की जाती है। दूसरी बार सफलता प्राप्त करने पर अभ्यर्थी को उपरोक्त उल्लेखित राशि की 50 प्रतिशत राशि एवं तीसरी बार योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाता।

अंगेजी हुकुमत के विरूद्ध हुआ कोल विद्रोह

मंत्री डॉ. विजय शाह ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में कोल समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोल जनजाति ने अंग्रेजी हुकुमत के अन्याय के विरूद्ध 1831 में अंग्रेजों से लोहा लिया, जिसे कोल विद्रोह के रूप में याद किया जाता है। बुधू भगत और मदारा महतो के नेतृत्व में कोल विद्रोह असमानता, शोषण और अत्याचार के विरूद्ध अन्य जनजातियों के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना। कोल विद्रोह से प्रभावित होकर इसका अनुसरण करते हुए अन्य कई जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

 

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