चीन की सख्ती से भारत की ऑटो कंपनियों पर मंडराया संकट, ठप हो सकता उत्पादन, सरकार से मदद की मांग

नई दिल्ली 
भारत में कार निर्माण कंपनियों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के चलते देश में वाहन उत्पादन जून की शुरुआत से ठप हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उद्योग समूह और प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने सरकार से इस आपूर्ति संकट को हल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

मैग्नेट न मिलने से मई के अंत तक खत्म हो जाएगा स्टॉक
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों को बताया कि कई ऑटो पार्ट निर्माता मई के अंत तक अपने स्टॉक से पूरी तरह खाली हो सकते हैं। इस स्थिति में जून की शुरुआत से वाहन उत्पादन बंद होने की आशंका जताई गई है। यह जानकारी 19 मई को मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स के अधिकारियों की उपस्थिति में दी गई थी।

सरकार से की गई तत्काल मदद की मांग
SIAM पिछले कई सप्ताहों से सरकार से आग्रह कर रहा है कि वह चीनी बंदरगाहों पर अटके मैग्नेट शिपमेंट तक भारतीय कंपनियों को पहुंच दिलाने में मदद करे। संगठन ने कहा है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो उत्पादन पर व्यापक असर पड़ेगा।

क्या है रेयर अर्थ मैग्नेट और क्यों है जरूरी?
रेयर अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों, पावर विंडो, स्पीकर्स और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में इस्तेमाल होते हैं। भारत का अधिकांश आयात चीन से होता है। अब चीन की नई पॉलिसी के तहत इन मैग्नेट के निर्यात के लिए कंपनियों को 'एंड-यूज सर्टिफिकेट' देना होगा, जिससे यह स्पष्ट हो कि मैग्नेट सैन्य उपयोग के लिए नहीं हैं। इसके बाद इन दस्तावेजों को नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास से सत्यापित कराना होगा, जिसके बाद चीन लाइसेंस जारी करेगा।

SIAM का सुझाव: कुछ घंटों में मिले मंजूरी
SIAM ने सुझाव दिया है कि भारत सरकार को चीनी दूतावास और वाणिज्य मंत्रालय से समन्वय करके इन दस्तावेजों को “कुछ ही घंटों में” मंजूरी दिलवानी चाहिए ताकि समय रहते आपूर्ति बहाल हो सके।

आंकड़ों में झलकती है गिरावट
सीमा शुल्क डेटा के अनुसार, अप्रैल 2025 में चीन से स्थायी मैग्नेट का निर्यात 51% गिरकर 2,626 टन रह गया, जो पिछले वर्ष इसी महीने में अधिक था। भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 460 टन रेयर अर्थ मैग्नेट आयात किए थे, और इस वर्ष यह संख्या 700 टन तक पहुँच सकती है, जिसकी अनुमानित कीमत 30 मिलियन डॉलर है।

भारत-चीन संबंधों का भी असर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण कूटनीतिक संबंधों के चलते भारतीय कंपनियों को चीन से शीघ्र निर्यात अनुमति मिलने की संभावना कम हो सकती है, जबकि चीन ने वोक्सवैगन जैसी कंपनियों के लिए पहले ही कुछ मंजूरी जारी कर दी है।

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