सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून पर फिलहाल रोक से इनकार किया, वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं

नई दिल्ली
 नए वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने वक्फ कानून पर फिलहाल स्टे नहीं लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब देगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि काउंसिल और बोर्ड को कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ शामिल हैं। उनको न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर को बदला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करना चाहिए।

वक्फ कानून पर SC ने नहीं लगाई रोक

वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि नए संशोधन अधिनियम के तहत परिषद या बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि सरकार अगली तारीख तक उन संपत्तियों (वक्फ-बाय-यूजर) को डी-नोटिफाई नहीं करेगी जो रजिस्टर्ड और गजटेड हैं। हालांकि, सरकार अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

ओवैसी बोले- हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं

अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने आगे कहा कि केंद्र ने कोर्ट से कहा कि आप संसद की ओर से पारित कानून पर रोक नहीं लगा सकते और केंद्र रोजाना सुनवाई के लिए तैयार है। इस मुद्दे को अब 5 मई के लिए लिस्ट किया गया है और उसी दिन सुनवाई शुरू होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं।

'इस एक्ट के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी'

ओवैसी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा। 'वक्फ बाय यूजर' को हटाया नहीं जा सकता। जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए एक रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था। इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बड़ी बातें

    सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया।

    सर्वोंच्च अदालत ने कहा कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।

    केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें वक्त दिया।

    शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी।

    याचिकाओं पर सुनवाई के दूसरे दिन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि अगर किसी वक्फ संपत्ति का रजिस्ट्रेशन 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है तो उन संपत्तियों को नहीं छेड़ा जा सकता।

    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक 'वक्फ बाय डीड' और 'वक्फ बाय यूजर' को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।

    सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में और क्या-क्या कहा?

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं किया जाएगा। सात दिनों में सरकार जवाब दाखिल करें।
    जवाब तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।

    सरकार फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं होगी। ना कोई नया बोर्ड बनेगा, ना काउंसिल बनेगी।

    एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करने से पहले विचार करे कि इसका परिणाम क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया।

    एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।

    सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी सरकार 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।

    उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

    जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। उस पर प्रतिउत्तर अगले 5 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।

    सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे। हम यहां केवल 5 ही चाहते हैं। आप 5 का चयन करें। अन्य को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा। हम नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। अब इसे कहा जाएगा- इन री: वक्फ संशोधन अधिनियम मामला

 

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