जम्मू-कश्मीर में 215 स्कूल सरकारी नियंत्रण में, आतंकी लिंक वाले संस्थानों पर सख्ती

श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) और उसके सहयोगी फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) से कथित रूप से संबद्ध 215 स्कूलों की प्रबंध समितियों को अपने नियंत्रण में लेने का आदेश दिया.

सरकारी आदेश संख्या 578-जेके (शिक्षा) 2025 के अनुसार यह निर्णय खुफिया एजेंसियों की प्रतिकूल रिपोर्टों के बाद लिया गया है. इसमें इन संस्थानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा हुआ बताया गया है. आदेश में कहा गया, 'खुफिया एजेंसियों ने कई स्कूलों की पहचान की है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई)/फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) से संबद्ध पाए गए हैं.'

इसमें कहा गया, 'ऐसे 215 स्कूलों की प्रबंध समितियों की वैधता समाप्त हो चुकी है या खुफिया एजेंसियों द्वारा उनके बारे में प्रतिकूल रिपोर्ट दी गई है.' प्रशासन ने निर्देश दिया है कि इन स्कूलों का प्रबंधन अब संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और उपायुक्तों द्वारा देखा जाएगा. उन्हें उचित सत्यापन के बाद नई समितियों का प्रस्ताव देने का काम सौंपा गया है.

आदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि इन स्कूलों में नामांकित छात्रों का शैक्षणिक भविष्य बाधित नहीं होना चाहिए. जिलाधिकारियों को स्कूल शिक्षा विभाग के परामर्श से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उपाय करने को कहा गया है.

अधिकारियों ने बताया कि यह कदम जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा नियम 2010 के प्रावधानों के तहत उठाया गया है. इसे 2018 के एसआरओ 292 और 2022 के एसओ 177 के साथ पढ़ा गया है. 215 स्कूलों में से 53 बारामूला में 37 अनंतनाग में 36 कुपवाड़ा में 22 पुलवामा में 20 बडगाम में 16 कुलगाम में 15 शोपियां में छह-छह गंदेरबल और बांदीपुरा में तथा चार श्रीनगर में स्थित हैं.

जमात-ए-इस्लामी को 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था. अधिकारियों ने इस समूह पर क्षेत्र में आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया था. एफएटी जम्मू और कश्मीर में स्कूलों का एक नेटवर्क चलाता है भी संगठन के साथ कथित संबंधों के लिए जांच के दायरे में आ गया है.

जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई पूर्व सदस्यों ने अलगाववाद के विचार को त्याग दिया और यहाँ तक कि जम्मू-कश्मीर में 2024 के विधानसभा चुनाव भी लड़े. पूर्व जमात नेताओं ने इस साल अप्रैल में एक नई राजनीतिक पार्टी, जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट (जेडीएफ) भी शुरू की.

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